जब सीबीआई को लेनी पड़ी आर्मी की मदद


Posted on February 6, 2019 at 6:00 PM


cbi un biswas and mamta banerjee

आजकल हर जगह सीबीआई की चर्चा है गूगल सर्च इंजन में सीबीआई कीवर्ड बन गया हर चौक पर हर नुक्कड़ पर हर पान की दुकान पर सीबीआई को लेकर बाद विवाद जारी है सीबीआई के बारे में लोगों की रुचि जो आज हुई है वह शायद पहले कभी नहीं हुई थी पर क्या आपको मालूम है सीबीआई को सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना बंगाल में नहीं बल्कि 1997 में बिहार में करनी पड़ी थी और कठिनाई इतनी बड़ी थी कि सीबीआई को आर्मी से मदद मांगनी पड़ी थी। वह क्या कारण थे जिसके लिए सीबीआई को आर्मी से मदद मांगनी पड़ी।

मई 1997 बिहार का साम्राज्य राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव के हाथ में था उन दिनों को जंगल राज के नाम से भी याद किया जाता था बिहार में चारों ओर भ्रष्टाचार का माहौल था आम नागरिकों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं थी स्थिति तो यह थी कि राजधानी पटना में लोग रात को घर से बाहर नहीं निकलते थे अपराधियों को राज्य के कुछ बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त था इन सबके अलावा उस समय के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर भ्रष्टाचार के अनगिनत आरोप थे और उसमें से चारा घोटाला एक था।

1996 में जब संयुक्त मोर्चा की सरकार केंद्र में बनती है तो चारा घोटाले का मुकदमा सीबीआई को सौंप दिया गया जिसका लालू प्रसाद यादव ने विरोध भी किया उनका कहना था कि यह मामला बिहार पुलिस देखेगी मगर तब के केंद्रीय मंत्री और वामपंथी दल के नेता इंद्रजीत गुप्ता ने उनकी अर्जी को खारिज करते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की आदेश दिया जब मामला सीबीआई के पास आया तो सीबीआई ने बिहार सरकार और राज्य के करीब 55 मंत्री और कर्मचारियों पर केस किया कर्मचारियों को तो वैसे ही गिरफ्तार कर लिया गया मगर जब लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करने के बात आई तो सीबीआई को हिम्मत नहीं हुई उनके कार्यालय में जाकर या उनके निवास पर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने की उस समय के सीबीआई चीफ इन विश्वास पहले तो राज्य के मुख्य सचिव कोई चिट्ठी लिखी जिसमे उन्होंने लालू यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मदद की गुहार लगाई मगर वहां से जवाब आया कि डीजीपी साहब छुट्टी पर है विश्वास ने राज्य के पुलिस अधिकारी को एक पत्र लिखा उसके बाद भी वही जवाब दिया गया। वहां से भी कोई मदद नहीं आई तब एक पटना के आईजी ने उन्हें सलाह दी कि वह आर्मी की मदद क्यों नहीं लेते जब विश्वास ने दानापुर आर्मी कैंट के प्रमुख को एक पत्र लिखा कि हम लालू यादव को गिरफ्तार करने जा रहे हैं कृपया आप अपनी आर्मी को स्टैंडबाई पर रखिए क्योंकि कानून व्यवस्था बिगड़ सकता है यह मुद्दा लोकसभा में भी उठा और तब के गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने पुष्टि की कि सीबीआई ने कानून व्यवस्था को देखते हुए आर्मी से मदद मांगी है।

सीबीआई कर्मचारियों को और नेताओं को तो बिना किसी विशेष सूचना के गिरफ्तार कर सकती हैं मगर जब बात मुख्यमंत्री की आती है तो मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने के लिए उन्हें स्पेशल परमिशन की आवश्यकता होती है क्योंकि मुख्यमंत्री थाने में जाकर आत्मसमर्पण नहीं कर सकता या उसे बिना स्पेशल परमिशन के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है उसकी पद की गरिमा होती है और उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे जब उन्हें यह पता चला कि मामला आर्मी तक पहुंच गई है तो उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और मुख्यमंत्री का पद अपनी धर्मपत्नी श्रीमती राबड़ी देवी को सौंपा फिर कहीं जाकर सीबीआई ने लालू यादव को गिरफ्तार किया उसके बाद कई बार लालू यादव लालू प्रसाद यादव सीबीआई के सामने पेश हुए दलीलें हुई बहस हुई और करीब 15 -20 साल बाद रांची के उच्च न्यायालय ने उन्हें चारा घोटाले मुकदमा में दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई और यह खबर लिखे जाने तक लालू यादव आज भी जेल की सलाखों के पीछे हे।

उस समय सीबीआई के बिहार के मुख्य संयुक्त निदेशक UN विश्वास आप जानते हैं आज क्या कर रहे हैं यूएन विश्वास ने सीबीआई पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में कदम रखा और जो पार्टी उन्होंने जॉइन किया उस राजनीतिक दल का नाम है तृणमूल कांग्रेस पार्टी जी हां यह वही तृणमूल कांग्रेस पार्टी है जो कि सीबीआई को बंगाल में काम करने नहीं देना चाहती है और यह वही विश्वास है जो कि खुद जब सीबीआई प्रमुख थे तो लालू प्रसाद यादव के गिरफ्तारी के लिए आर्मी की सहायता मांग रहे थे और अब वह खुद सीबीआई को बंगाल में काम नहीं करने दे रहे हैं।

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