तीन तलाक मुस्लिम समाज में फैली कुप्रथा और राजनीति ,अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो तीन तलाक कानून लागु नहीं होगा।


Posted on February 13, 2019 at 10:00 AM


तीन तलाक और  राजनीति

तीन तलाक मुस्लिम समाज में फैली एक कुप्रथा का नाम है जोकि मुस्लिम मर्दों द्वारा अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इस नियम के तहत कोई भी मुस्लिम पति अपनी पत्नी से जिससे उसकी ना बनती हो या जिससे उसको दिक्कत हो मात्र तीन बार तलाक तलाक तलाक कहकर तलाक ले सकता है सिर्फ कह कर ही नहीं वह लिखित में या फिर फोन के माध्यम से भी बोल कर तलाक ले सकता है इसको उर्दू में तलाक केविदत भी कहते हैं।

यह कुप्रथा मुस्लिम समाज में सदियों से चली आ रही है आजादी के बाद भारत में हिंदू धर्म में काफी संशोधन हुए जैसे कि सती प्रथा और दहेज के खिलाफ कानून बने मगर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के द्वारा निर्मित मुस्लिम कानून जो कि 1937 ईस्वी में बनाया गया था उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई और आश्चर्य की बात तो यह है कि तीन तलाक मुस्लिम देश जैसे कि सऊदी अरब और पाकिस्तान में गलत है उसका उपयोग वहां नहीं होता है फिर क्या कारण है जो या आज तक भारत में यह लागू है।

इसका वजह राजनीतिक है भारत के विभाजन के बाद कांग्रेस को लगा कि हमे हिंदू तो वोट देते ही है लेकिन अगर हमें भारत में लंबे समय तक राज्य करना है तो हमें मुसलमानों का भी एकतरफा मत चाहिए और जिसके कारण था कि उन लोगों ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा 1937 में बनाई गई मुस्लिम कानून में कोई संशोधन नहीं किया यहां तक कि जब 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया और जब एनडीए की सरकार ने इसे संसद में पेश किया तो वहां पर कांग्रेस ने तो इसका समर्थन किया मगर फिर राज्यसभा में जाकर वह बदल जाते हैं और इस बिल का विरोध करने लगते हैं हद तो तब हो गई जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में उनकी एक महिला सांसद जोकी आशाम से आती है ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह तीन तलाक को फिर से कानूनी दर्जा दिला देगी। मतलब मुस्लिम मर्द फिर से महिलाओ को तलाक दे सकते हैं।

हद है दोगले राजनीति की एक धर्म को खुश करने के लिए आप भारत की सर्वोच्च न्यायालय की बात भी नहीं सुनते हैं यह सब क्यों करते हैं यह सब सिर्फ एक धर्म के मत को प्राप्त करने के लिए क्या आपको पता है कि इससे समाज की महिलाओं का कितना शोषण होता है अभी हाल ही में मीडिया में एक खबर आती है कि उत्तर प्रदेश के एक जिले में एक पति ने अपनी पत्नी को तीन तलाक कहकर तलाक दिया फिर उनके परिवार के बीच बचाओ के कारण पति और पत्नी एक दूसरे के साथ रहने पर राजी हो जाते हैं मगर अब इस महिलाओं को पति के साथ रहने के लिए हलाला करवाना होगा हलाला वह नियम है जिसके तहत पत्नी को किसी दूसरे मर्द के साथ शादी करनी पड़ती है और कम से कम एक रात उसके साथ बिताने के बाद मर्द से तलाक लेकर फिर अपने पति के पास जा सकती है, उस महिला ने भी ऐसा किया उसने अपने ससुर के साथ निकाह तो किया और फिर एक रात बिताने के बाद उसके ससुर ने उसे तलाक दिया तब जाकर वह अपने पति के साथ रह पाई फिर अचानक कुछ महीनों बाद पति अपनी पत्नी पर फिर गुस्सा करता है और गुस्से में वह फिर से तीन तलाक बोल देता है जिसके कारण उसका और उसकी पत्नी का निकाह अवैध हो जाता है फिर उनके परिवारों के बीच मध्यस्थता होती है और फिर से पति पत्नी एक दूसरे के साथ रहने पर राजी हो जाते हैं अब फिर से इस महिलाओं को हलाला करवाना पड़ता है और इस बार हलाला में उसे अपने देवर के साथ शादी करनी पड़ती है और एक रात बिताने के बाद उसका देवर उसे तीन तलाक देता है और फिर वह उसके बाद अपने पति के साथ रहने को जाती है इस दौरान उस महिला का दो बार विभिन्न पुरुषों के द्वारा संबंध बनाना पड़ता है जिसे कि हम यह भी कह सकते हैं कि उस महिला का दो बार बलात्कार होता है यह एक सभ्य समाज के लिए कितनी बुरी बात है यह ऐसा बर्बर कानून है जिसे किसी समाज में और किसी देश में कोई जगह नहीं मिली यहां तक कि कुछ मुस्लिम देशों ने भी इस नियम को नकार दिया उसे हम भारत में आज भी एक धर्म समुदाय को खुश करने के लिए पाले जा रहे हैं।

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