आइये भारतीय सेना पर मिलकर पत्थर मारते है ?


Posted on February 19, 2019 at 5:00 PM


भारतीय सेना पर पत्थर  मारते है

सोमवार 18 February को सुरक्षाबलों और छुपे हुए आतंकवादियों के बिच पुलवामा में फिर से मुठभेड़ हुआ जो जिसमे पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के लिए जिम्मेदार और मास्टरमाइंड मसूद कामरान और IED स्पेशलिस्ट गाज़ी रशीद और एक अन्य आतंकवादी को हमारी सेना ने मार गिराया। पर इस मुठभेड़ में भारतीय सेना के एक मेजर रैंक के अधिकारी सहित चार सैनिक भी शहीद हो गए।
जब यह मुठभेड़ हो रहा था और आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा रहा था तब हमेशा की तरह कुछ कश्मीरी लोग हमरी सेना को पत्थर मार रहे थे और आतंकवादियों की मदद में लगे हुए थे। भारतीय सरकार ये मानती है की इन पथरबाजो को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पैसे देती है और आतंकवादियों की मदद के लिए उकसाती है। वहाँ के लोकल लीडर इन्हे भटके हुए कश्मीरी कहते है।

क्या भारतीय सेना पर पत्थर मारने वालों पर कोई करवाई नहीं होनी चाहिए क्या भारतीय सेना को तथाकथित भटके हुए कश्मीरियों से पत्थर खाते रहना चाहिए। अगर हम इसी तरह की सोच रखेंगे तो कल पंजाब में फिर बिहार में फिर बंगाल में सेना के जवानो पर पत्थर मारे जायेंगे और हम सिर्फ यही कहेंगे की ये भटके हुए है। आखिर भारतीय सेना की गरिमा से खिलवाड़ कब तक बर्दाश्त किया जायेगा।

क्या हमने कभी सोचा है ऐसा भारत में ही क्यों होता है हम सेना के जवान जिसके हाथ में घातक हथियार हो उसे पत्थर मार सकते है थपड़ और मुका मार पाते है ऐसा अन्य देशो मे क्यों नहीं होता। इजराइल , यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका , यहाँ तक की पाकिस्तान में भी किसी की हिम्मत नहीं होती की सेना के जवान को पत्थर मारे और गाली दे। कैसा लगता होगा एक सैनिक को जब वह देश की सेवा करने का जज्बा लिए सेना में शामिल होता है और उसके हाथ में हथियार होते हुए भी पत्थर और गालियाँ खानी पड़े।

मानवाधिकार की दुहाई

कश्मीर की भी अजब कहानी है वहाँ के नेता को ये पत्थरबाज भटके हुए नागरिक लगते है वही अगर सेना कुछ एक्शन लेती है तो ये नेता और तथाकथित मानवाधिकार के रखवाले मानवाधिकार की दुहाई देने लगते है क्या उन्हें इन सैनिको की मानवाधिकार की बात समझ में नहीं आती। क्या पुलवामा में शाहिद हुए 40 सैनिक मानव नहीं थे उनका कोई मानवाधिकार नहीं था। सोमवार 18 February को शाहिद हुए 40 सैनिको का कोई मानवाधिकार नहीं था ( शायद आपको याद हो जब सेना ने एक कश्मीरी पत्थरबाज को अपनी रक्षा के लिए गाड़ी से बांध कर घुमाया था तो किस तरह मावधिकार का नाटक किया गया था ) अब 42 जवान के शाहिद होने के बाद उन्ही मानवाधिकार की दुहाई देने वाले संगठनो और नेताओ की आँखो पर पट्टी बांध गई है। इन शहीदो के परिवार के लोगों का कोई मानवाधिकार नहीं दिख रहा है इन्हे।

भारतीय मीडिया और कश्मीर

पैसे कमाने और आगे निकल जाने की होड़ लगी है हर एक चैनल और अख़बार अपने आप को नंबर एक चैनल और अख़बार घोषित करने में लगा है उन्हें शायद समस्या के समाधान से मतलब न हो बस हमें तो नंबर 1 रहना है चाहे सरकार की बुराई करने से हो या सेना की बुराई। इन्हे तो बस कुछ भी बोलना है चाहे वह देश हित में हो या न हो। कश्मीर समस्या के लिए हम सिर्फ सरकार को ही नहीं जिम्मेदार ठहराह सकते इसमें मिडिया ने भी अहम भूमिका निभाई है जब भी सेना ने किसी भी पथरबाज के खिलाफ कुछ करने की कोशिश की तो तथाकथित मानवाधिकार के रक्षक (जिन्हे सैनिको का मानवाधिकार नहीं दिखाता ) के अलावा मिडिया ने भी इसका प्रचार प्रसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। ये देश हमारा है हमें ये समझाना होगा अगर हमारे सैनिक सुरक्षित नहीं है तो देश सुरक्षित नहीं और अगर देश सुरक्षित नहीं तो ये मिडिया और मानवाधिकार के रक्षक कहाँ से सुरक्षित होंगे। आज सैनिको पर पत्थर मारा जा रहा है कल हम आपस में पथरबाजी का खेल, खेल रहे होंगे।

कुछ नेताओ और अभिनेताओ की नीचता (घर का भेदी लंका ढाये )

अभी पुलवामा हमले के बाद सरकार और भारतीय सेना दुश्मन से निपटने के बारे में सोच ही रही थी की अपने ही देश में रहने वाले और यहाँ की रोटी खाने वालों ने अपने देश, भारतीय सेना और सरकार का मनोबल तोड़ने का काम चालू कर दिया ऐसे ही हमरे कुछ नेता और अभिनेता है कमल हसन , नवजोत सिंह सिद्धू। कमल हसन ने तो यहाँ तक कह दिया की जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए (जो की पाकिस्तान की हमेसा मांग रही है ) और उन्होंने POK को आजाद कश्मीर तक कह दिया। यह समय भारतीय सेना के साथ खड़ा रहने का है न की भारतीय सेना और सरकार मनोबल गिराने वाले बयान बजी का। जब घर में ही दुश्मन हो तो देश क्या करे।

अगर हम पहले ऐसे सोच रखने वालो से नहीं निपटेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब हर गली में आपको एक कमल हसन और कन्हैया कुमार जैसा देशद्रोही मिलेगा जो कहता फिरेगा भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, जंग रहेगी। सोचिए आपको कैसा देश चाहिए।

अगर हम इसी तरह सेना के प्रतिष्ठा पर हमला करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब भारतीय सेना का मनोबल टूट जायेगा और सेना का सरकार से विश्वास उठ जायेगा और पाकिस्तान की तरह इंडिया में भी सेना शासन को अपने कब्जे में लेने के लिए मजबूर हो जाएगी।

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