फँस गए कॉंग्रेसियो के जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा।


Posted on February 8, 2019 at 10:00 AM


रॉबर्ट वाड्रा और उनके कारनामे

रॉबर्ट वाड्रा राहुल गांधी के जीजा जी हैं उनका विवाह प्रियंका गांधी से 1997 को हुआ था उनकी मुलाकात प्रियंका से 1991-92 में एक पार्टी के दौरान हुई थी फिर दोनों में प्यार हुआ और शादी हो गई। रोबोट के पिताजी उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर मुरादाबाद में रहते थे और उनका पुराने बर्तनों और कबाड़ी का व्यापार था रॉबर्ट एक काफी ही साधारण से परिवार से आते थे। मगर शादी के बाद उनका परिवार एक साधारण परिवार से खास परिवार हो गया ।

शादी के बाद रॉबर्ट वाड्रा के परिवार में एक के बाद एक रहस्यमय मृत्यु होने लगी पहले उनकी बहन की मृत्यु रोड एक्सीडेंट हो जाती है जिसका प्रियंका और रॉबर्ट को मिलाने में अहम योगदान था फिर उनके पिता भी 2 साल बाद एक होटल में आत्महत्या कर लेते हैं आज तक उनके आत्महत्या करने के कारणों का पता नहीं चल पाया हैं। अभी उनके परिवार में सिर्फ उनकी मां बची है जो कि उनकी बिजनेस पार्टनर है और स्टरलाइट हॉस्पिटैलिटी की मैनेजिंग डायरेक्टर भी है।

रॉबर्ट वाड्रा का नाम भ्रष्टाचार में सबसे पहले 2011 में आया जब तक के इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य अरविंद केजरीवाल जो कि आज के दिल्ली के मुख्यमंत्री भी है ने उन पर आरोप लगाया कि डीएलएफ ने कमीशन के तौर पर प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को हरियाणा ,राजस्थान और दिल्ली में बिना किसी पैसे के काफी बड़ी जमीन दी है जमीन का मूल्य करीब 65 करोड़ था जो कि बिना किसी पैसे के रॉबर्ट वाड्रा के नाम पर ट्रांसफर की गई थी।

उस समय तो कोई जाँच या कारवाई नही नही हुआ सिर्फ हल्ला हो कर ही रह गया मगर जब 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो एक साल बाद नरेंद्र मोदी ने जांच के आदेश दिए। ईडी ने जांच में रॉबर्ट वाड्रा की कई बेनामी संपत्तियों का पता लगाया और अभी हाल में ही उन्हें सवाल पूछने के लिए अपने दफ्तर में बुलाया।

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मामला क्या है।

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मामला क्या है।
2007 में यूपीए की सरकार एक पेट्रोलियम डील करती है और उसका कमीशन जाता है सिंटेक्स इंडस्ट्रीज को जिसके मालिक थे रमेश भंडारी। रमेश भंडारी ने उन पैसे से लंदन में एक प्राइम लोकेशन पर एक बड़ा सा बंगला खरीदा जिसकी कीमत 19 करोड़ के आसपास है जो कि कुछ दिनों के बाद सी बी थंपी को ट्रांसफर कर दी जाती है। थंपी रॉबर्ट वाड्रा के स्काईलाइन हॉस्पिटैलिटी में पाटनर है और उनके करीबी भी है थंबी पर फेमा अधिनियम के तरह 1000 करोड़ की हेराफेरी का भी आरोप है बात यहीं खत्म नहीं होती है रमेश भंडारी की एक और कंपनी है ऑफसेट इंटरनेशनल सर्विलेंस जो कि डिफेंस डील में काम करती है 2009 में यूपीए एक डिफेंस डील करती है इसके भी कमीशन के पैसे रमेश भंडारी को मिलते हैं और उस पैसे से रमेश भंडारी लंदन में और 3-4 प्रॉपर्टी खरीदते है जिसकी कीमत कुल मिलाकर करीब 80 करोड़ के आसपास मापी गई है इन सब मकानों को भी वह skyline के नाम पर ट्रांसफर कर देता है हालांकि उसमें रॉबर्ट वाड्रा का नाम नहीं रहता है नाम किसी दूसरे का रहता है। बात का खुलासा तब होता है जब मनोज अरोड़ा जो कि स्काईलाइन हॉस्पिटैलिटी में काम भी करते थे उनके और रमेश भंडारी के बीच हुई ई-मेल का खुलासा होता है जिसमें रमेश भंडारी को मनोज अरोड़ा बताता है कि क्या-क्या इंटीरियर करना है घरों में और यह सारे वही घर थे जिसे की रमेश भंडारी ने कमीशन के पैसे से खरीदा था।
दोस्तों सबसे मजेदार बात है कि रॉबर्ट वाड्रा जिनको की बिजनेस चालू करने के लिए ₹100000 भी नहीं थे वह कैसे इतनी संपत्तियों का मालिक बन बैठा और सबसे बड़ी ताजुब की बात यह है कि उसने 2006 से 2009 के बीच में तीन कंपनियों का गठन किया और यह वही वक्त था जब यूपीए में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर था कहा तो यह भी जाता है कि जितने भी डील होते थे सब में रॉबर्ट वाड्रा को कमीशन मिलता था वह कमीशन डायरेक्ट तो नहीं मिलता था पर जिस भी कंपनी के साथ डील होती थी वह कंपनी रॉबर्ट वाड्रा के किसी खास रिश्तेदार या जानने वाले को पैसे या प्रॉपर्टी उनके नाम ट्रांसफर करता था।

यह किसी बच्चे या किसी अनपढ आदमी भी जानता है की रातों रात कोई अमीर नहीं बन सकता। जिस व्यक्ति के पास बिजनेस चालू करने के लिए लाख रुपए ना हो वह व्यक्ति करोड़ों का स्वामी कैसे बन सकता है गौर से देखा जाए तो जो बिजनेस रॉबर्ट वाड्रा करता है उसमें से आदमी आराम से जिंदगी तो बसर कर सकता है मगर ऐशो आराम की जिंदगी नहीं बसर कर सकता है और रॉबर्ट वाड्रा जिसकी देश विदेश में प्रॉपर्टी है उसने कैसे अर्जित की है इतनी सम्पति। उसे हिसाब तो देना होगा क्योंकि उसके काले कारनामों का धीरे धीरे खुलासा देश की जनता के सामने हो रहा है अगर वह निर्दोष है तो बताएं कि उसने अपनी सारी संपत्ति कैसे अर्जित की और अगर वह नहीं बता पाता तो साफ पता चल जाएगा कि यूपीए के दौर में जो भ्रष्टाचार होते थे जो कमीशन खोरी होती थी उसमें रॉबर्ट वाड्रा भी एक कड़ी था और यह सब देखकर तो यही लगता है या यही कहते बनता है कि फँस गए कॉंग्रेसियो के जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा।

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