क्या भारत इजरायल की तरह बदला लेगा पुलवामा आतंकी हमले का


Posted on February 17, 2019 at 10:00 AM


revenge of pulwama terrorist attack

42 जवान शहीद शहीद हो गए 2 दिनों से समाचार चैनलों और पत्रों में शहीद जवानों की अंतिम संस्कार के चित्र दिखाए जा रहे है जिसे देख कर हर भारतीय के मन में गहरा असंतोष दुख और गुस्सा है सभी भारतीय चाहते हैं इस कि इस घिनौना अतंकवादी कार्यवाही का बदला जरूर लिया जाए हम पाकिस्तान से 42 सैनिकों के बलिदान का हिसाब लेना चाहते हैं मगर कैसे।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इसराइल जैसी नीति अपनानी चाहिए जैसे इसराइल अपने दुश्मनों की सफाया करता है वैसे भारत को करना चाहिए यह सभी जानते हैं कि कैसे इसराल जो कि एक छोटा सा देश है और अपने चारों ओर दुश्मनों से घिरा हुआ है और वह अकेला अपने आप को बचा के रखता है चारों तरफ से दुश्मन से घिरे रहने के बाद भी कोई भी देश उस पर आतंकवादी हमला करने से पहले 20 बार सोचता हैं क्योंकि वे जानते हैं कि अगर हमने कोई आतंकवादी गतिविधियां वहां की तो इजरायल बदले की करवाई करेगा और हमें जायदा नुकसान पहुचायेगा। इजरायल ने ऐसा किया भी है जब भी उस के ऊपर आतंकी हमला हुआ है क्या भारत इजरायल बन सकता है क्या भारत वह कर सकता है जो इसराइल अपने दुश्मनों के साथ करता है।

नहीं भारत ऐसा नहीं कर सकता हम जरूर चाहते हैं कि भारत पाकिस्तान पर आक्रमण कर दे टैंक लेकर पाकिस्तान सीमा में घुस जाए, हवाई हमला करे और पाकिस्तान को नस्तेनाबूत कर दे लेकिन अफसोस भारत यह सब नहीं कर सकता। कारण यह नहीं है कि यह सब करना भारत के बस के बाहर हैं या भारतीय सैनिकों में इतना आत्मबल और साहस नहीं है इसका कारण सिर्फ और सिर्फ राजनीति है। क्योंकि इसराइल में भारत के जैसी राजनीति नहीं है वहां कोई भी देश विरोधी गतिविधियां नहीं चलाता है वहां यह नारे नहीं लगते कि भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह भारत के बर्बादी तक जंग लड़ेंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह इजरायल एक ऐसा देश है जो अपने देश में देश बिरोधी गतिविधियां को बर्दाश्त न करने की निति रखता है। जब भी इजरायल में देश बिरोधी गतिबिधियाँ करने की कोशिश की गई तब इजरायल ने बिना किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवाधिकार संगठनो का परवाह किये देशद्रोहियो और देश बिरोधी गतिबिधियाँ करने वालो पर सख्त करवाई की है वहाँ कोई नेता यह नहीं कहता की करवाई राजनितिक फायदे के लिया किया जा रहा है कोई भी देशद्रोहियों के समर्थन में नही बोलता। वहाँ कोई फारुख अब्दुला , उमर अब्दुला , महबूबा मुफ़्ती और नवजोत सिंह सिद्धू नहीं होता। वहाँ राष्ट्र हित सर्वोपरि होता है।

इसका एक और उदाहरण अभी चिता की राख पूरी तरफ से जली नहीं होगी कि कुछ पाकिस्तान के आई एस आई के टुकड़े पर पलने वाले और इस देश में रहने वाले और उस देश के गुण गाने वालों ने अपनी घटिया सोच को प्रकट करना चालू कर दिया।

हमारे देश के कुछ बुद्धिजीवी लोगो और नेताओ की सोच

हमारे देश के एक भूतपूर्व मशहूर क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू जो कि कांग्रेस के कद्दावर नेता है ने हमले के ठीक बाद यह बयान दिया की आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता कोई देश नहीं होता और उन्होंने पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर और जनरल को इस हमले से क्लीनचिट दे दिया इस बात को पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल और मीडिया वालों ने काफी प्रमुखता से प्रकाशित किया और भारत पे ये इल्जाम भी लगाया कि देखिए खुद आप के नेता यह कह रहे हैं नवजोत सिंह सिद्धू अकेले ऐसे नेता नहीं है आम आदमी पार्टी के भूतपूर्व नेता प्रशांत भूषण जो कि एक वकील भी है ने भी यह बयान दिया कि अतीक अहमद भारतीय सेना के कारण आतंकी बना और उन्होंने अपने बयान के लिए इंडिया टुडे जो कि इंडिया टुडे के जगह पाकिस्तान टुडे नाम होना चाहिए के रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें इंडिया टुडे ने आतंकवादी के माता-पिता से बात की और बताया कि उसे भारतीय सेना ने एक बार मारा था जिसके वजह से वह आतंकवादी बन गया यह हो क्या रहा है जिस देश में अभी 42 जवानों की चिंताएं की राख भी ठंडी नहीं हुई है कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने क्या बयान दिया कि नरेंद्र मोदी के आने के कारण देश में आतंकवादी घटनाएं बढ़ने लगी ठीक है आप राजनीति कीजिए ना आप मोदी से लड़ लेना मगर जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात होती है तब तो राजनीति मत कीजिए कुछ प्रमुख पत्रकार जैसे राजदीप सरदेसाई सागरिका घोष ने भी पाकिस्तान समर्थित कुछ बयान दिए जो कि समझ से परे है। कुछ नेता तो हमारे बहादुर जवान पर और भारतीय सेना पर ही सवालिया निशान उठा रहे है एक नेता ने तो यहाँ तक कह दिया की जो हुआ उसके लिए सेना ही जिम्मेवार है। ऐसा क्यों हो रहा है हम सारे मतभेद भुला कर इस राष्टीय संकट की घडी में एक नहीं हो पा रहे है। कोई उमर अब्दुला जैसा नेता क्यों ऐसे बयान देता है की देश के अन्य हिस्सों में पढ़ने वालो और रहने वालो कश्मीर के बच्चों की सुरक्षा का ध्यान दिया जाए। क्या देश के सरकार इस जिम्मेदारी को नहीं समझ रही है। क्या आप का कर्तब्य नहीं था की वहाँ के लोगो को समझाया जाए की आतंकवाद का रास्ता गलत है अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जो हुआ वो क्या देशद्रोह नहीं था। आज हमें देशद्रोह को परिभाषित करने की जरुरत है इन नेताओ , बुद्धिजीवी समाज को समझाना होगा की अगर देश स्थिर नहीं होगा तो हम कभी विकास नहीं कर पाएंगे अपने घरेलु समस्याओं में ही उलझे रहेंगे।

कुछ मुठी भर नेता और अराजक तत्व पाकिस्तान द्वारा सरकार को अस्थिर करने और आराजकता फ़ैलाने के प्रयास के बाद भी रह रह कर सरकार पर ही सवालिया निशान उठा रहे हैं शायद उनका मकसद है की किसी तरह लोगों के पास यह संदेश पहुंच जाए कि देखिए इस सरकार में आतंकवादी हमला हो गया। सरकार और एक आदमी के खिलाफ नफरत के कारण वह अपने देश से नफरत करने लगे , वो हरगिज यह नहीं चाहते कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ को ही बड़ी कार्यवाही करें क्योंकि उन्हें यह डर लग रहा है कि अगर पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक की या कोई अन्य बड़ी सफलता भारत अर्जित करता है तो उससे बर्तमान सरकार को फायदा पहुंचेगा और नरेंद्र मोदी एक बार फिर एक मजबूत नेता के रूप में उभरेंगे और एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे। इस तरह की मानसिकता से हमें ऊपर उठ कर देश हित में सोचने की आवशकता हैं

इसलिए भारत इजरायल नहीं बन सकता ,भारत इजरायल जैसे अपने विरोधी पर नहीं टूट सकता क्योंकि भारत के अंदर आज के दिन बहुत सारे जयचंद बैठे हैं भारत को उनसे निपटना होगा फिर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करना पड़ेगा फिर कहीं वह पाकिस्तान को सीधे रास्ते पर ला सकते हैं।

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