14 February 2019 पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पे किया गया सबसे बड़ा आत्मघाती हमला।


Posted on February 15, 2019 at 11:00 AM


pulwama terror attack and politics

14 February 2019 भारत के लिए काफी ही दुखद दिन साबित हुआ बरसों बाद भारतीय सुरक्षा बलों पे कश्मीर में किया गया सबसे बड़ा आत्मघाती हमला। यह उड़ी के बाद अब तक का सुरक्षाबलों पर किया गया सबसे बड़ा आतंकी हमला था। हर एक भारतीय का मन आज काफी उदास है उन जवानों के परिवार के प्रति संवेदना और पाकिस्तान के प्रति गुस्से का माहौल है । हर एक भारतीय आज बदले की बात कर रहा हैं इस आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने की बात कर रहा है। कुछ विपक्ष के नेता इस आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेकने में सरकार के साथ की बात कर रहे है। कुछ मुठी भर नेता ऐसे भी है जो इस समय भी अपनी राजनीती चमकाने में लगे है और सरकार की नाकामी का रोना रो रहे है।

गुस्सा तो भारतीयों को उन बुद्धिजीवियों पर भी आता है जो एक पत्थर बाज के मारे जाने पर कोहराम मचा देते हैं अवार्ड वापसी करने लगते हैं मगर आज जब हमारे सुरक्षा बल को आतंकियों ने निशाना बनाया है तो वह राजनीति कर रहे हैं जरा सोचिए कि अगर किसी पत्थरबाज को सुरक्षा बल ने मार दिया होता तो आज भारत में पल रहे टुकड़े टुकड़े गैंग ने कोहराम मचा दिया होता। कुछ डिजाइनर पत्रकार और बुद्धिजीवी अवार्ड वापसी करते मगर आज जब हमारे सुरक्षा बलों को उन्हीं पत्थर बाज आतंकियों में से एक आत्मघाती हमले करके मार देता है तो वह निंदा तो कर रहे हैं पर दबी जुबान में, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक विधार्थी ने तो इसका जश्न भी मनाया और टि्वटर पर कुछ आपत्तिजनक पोस्ट भी डालें। हमारी सरकार बाहर के आतंकियों से तो आप निपट सकती है पर आस्तीन में छुपे सांपों का क्या जब तक इस देश में जयचंद रहेंगे तब तक ऐसे आतंकी हमलों को रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है इंडियन गवर्नमेंट को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को सबक सीखनी चाहिये पर इन सबसे पहले देश में छिपे इन गद्दारों को इन डिजाइनर पत्रकार और बुद्धिजीवी को इन मानव अधिकार के रखवाले संगठनों को जो जब भी सेना अपने बचाव में कुछ करती है तो हो हल्ला करते हैं पहले आप उनसे निपटे क्योंकि यह वह आस्तीन के सांप है जो अंदर से हमें खोखला कर रहे।

देश कैसे भूल सकता है जब हम चीन से सीमा विवाद पर उलझे थे और हमारी सेना उनकी सेना के सामने खड़ी थी तो हमारे देश के एक नेता चुपके से जाकर चीनी उच्चायुक्त से मिलते हैं देश कैसे भरोसा करें उन नेताओं का जो पाकिस्तान जाकर यह कहते हैं की मोदी को हटाने में आप हमारी मदद कीजिए आप बेशक नरेंद्र मोदी से लडे आप उन्हें चुनाव में हराए आप उनकी गलत नीति की आलोचना भी कीजिए पर साथ में आप यह भी देखिए जितना यह देश नरेंद्र मोदी का है उतना ही यह देश आपका भी है कहीं ऐसा ना हो कि जैसे पृथ्वीराज चौहान को हराने के लिए जयचंद ने मोहम्मद गोरी को भारत बुलाया वैसे ही आप एक मोदी को हराने के लिए देश के साथ फिर से जयचंद वाले गद्दारी कर रहें हों। आज समय आ गया है जब सभी भारतीयों को एक साथ खड़ा हो इस आतंक और आतंकी सोच का सफाया करना होगा।

क्या आज कुछ कट्टरपंथी सोच रखने वालो को असहिष्णुता दिखाई नहीं देता

। भारत में असहिष्णुता शब्द का प्रयोग कुछ दिनों से काफी हो रहा है कुछ कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोग और कुछ मुठी भर नेता इस शब्द का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे है। उनका कहना है की इस देश में असहिष्णुता बढ़ी है कुछ अभिनेता तो यहाँ तक कहते है की देश मे घुटन सी होती है उनके बच्चे यहाँ सुरक्षित नहीं महसूस करते। इस आतंकी घटना के बाद क्या वो सुरक्षित महसूस कर रहे है। क्या उन्हें इस तरह का देश चाहिए। आज वो खामोश क्यों है। क्या कुछ मुठी भर आतंकी सोच रखने वाले कश्मीरी अलगावबादी नेताओ पर करवाई नहीं होनी चाहिए। याद रखे वो लोग जो रात में चैन से सोते है ये सिर्फ भारतीय सेना के शौर्य के कारण ही सुरक्षित है न की किसी धर्म और मजहब के कारण। उनकी रक्षा सिर्फ और सिर्फ भारतीय सेना करती है न की कोई गॉड और आल्हा।

आज हमें इस बात पर विचार करने की आवश्कता है की क्या निंदा करना इस समस्या का समाधान हैं , क्या पाकिस्तान को इसके लिए दोषी ठहराने से इस आतंकवाद रूपी समस्या का समाधान हो सकता है , क्या अन्य देशो की सहानुभति और पाकिस्तान के प्रति कड़े रुख से इस समस्या का समाधान हों सकता है। क्या इस देश को इंदिरा गाँधी जैसे एक डिक्टेटर की आवश्कता नहीं है जो उन पाकिस्तान का समर्थन करने वाले अलगाववादी नेताओ और मुठी भर पाकिस्तानी बिचारधारा रखने वाले लोगो को सबक सीखा सके। कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए क्या धारा 370 और 35 ए जैसी धारा को कश्मीर से हटाए जाने की आवश्कता नहीं है। क्या कश्मीर में रह रहे जयचंद रूपी गद्दारो को सबक सीखने की आवश्यकता नहीं है।

वरना यह देश सर्जिकल स्ट्राइक करता रहेगा और कोई जयचंद रूपी नेता सबूत मांगेगा। आप अगर आतंकियों को पकड़ लेंगे और उन्हें फांसी की सजा देने की कोशिश करेंगे तो फिर कोई वकील और मानवाधिकार संगठन रात को सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुलवा देंगे और इन सब से भी अगर बात ना बनी तो हमारे सेना का मनोबल गिराने के लिए वह सेना प्रमुख को गली का गुंडा भी कहने से नहीं हिचकेंगे।

क्या हाल होगा उन जवानों के परिवार वालों का कौन पोंछेगा उनके आंसू जिनके लाल चले गए उनके मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा आप और हम तो कुछ दिन बाद पाकिस्तान को या नेताओं को गाली देकर अपनी अपनी जिंदगी में मसरूफ हो जाएंगे उधर उनका क्या जिन्होंने अपना लाल इस आतंकी हमला में खोया है। शायद आपने अपना कोई नहीं खोया नहीं तो पता होता जवान बेटे की मौत का मातम कैसा होता है।

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