संवैधानिक संस्थाओं पर बढ़ता अविश्वास - राफेल पर कैग(CAG) की रिपोर्ट


Posted on February 14, 2019 at 11:00 AM


राफेल पर कैग की रिपोर्ट

गुजरात चुनाव के समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी को लेकर काफी हो हल्ला मचाया उन्होंने उसे गब्बर सिंह टैक्स का नाम दिया। राहुल गांधी सोच रहे थे कि गुजरात व्यवसायियों का प्रदेश है वहां वह जीएसटी का मुद्दा उठाएंगे तो उन्हें सफलता मिलेगी मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं और जब चुनाव के नतीजे आए तो भाजपा ने एक बार फिर वहां बाजी मारी और हद तो तब हो गई जब व्यापार के लिए या व्यवसाय के लिए सबसे उत्तम स्थान कहे जाने वाले सूरत शहर के 14 के 14 सीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी बीजेपी ने हासिल कर ली।

जो सुरत जीएसटी को लेकर इतनी परेशानी में था और खुलकर अपने गुस्सा को सार्वजनिक कर रहा था उन सब के बाद भी जब मत देने की बात आई तो सबने भाजपा को क्यों चुना। कारण था कि सबको मालूम था कि जीएसटी में कुछ कमियां तो है और यह पूर्ण रूप से सफल प्रयोग भी नहीं है मगर सबको एक चीज पर भरोसा था और वह था नरेंद्र मोदी सबको लगता था कि नरेंद्र मोदी ने कुछ अच्छे के लिए ही प्रयास किया होगा क्यों कि उनका व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था।

राहुल और कांग्रेस के नेताओं को तब ये बात पता चल गई कि जब तक वह प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर चोट नहीं करेंगे तब तक उन्हें सफलता नहीं मिलेगी और ईमानदारी पर चोट करने के लिए उनके पास कोई पुराना इतिहास तो था नहीं नया कुछ आने वाला था नहीं तो उन्होंने एक ऐसा मुद्दा चुना जिस पर की आज तक हर बार भ्रष्टाचार हुआ है और वह मुद्दा था रक्षा सौदों में दलाली अब तक आजादी के बाद जब भी कांग्रेस की सरकार रही और कोई भी रक्षा सौदा हुआ हो हर बार कॉग्रेस पर दलाली का इल्जाम लगा राहुल गांधी को लगा कि लोगों के बीच अगर वह इस बात को लेकर जाएंगे कि रफाल विमान जिसका कि सौदा नरेंद्र मोदी ने किया है उसमें भी दलाली लि गई है तो लोग मान जाएंगे। उन्होंने पहले तो कोशिश की और चौकीदार चोर है का नारा दिया उनके कुछ दलाल मीडिया के लोगों और सारी भ्रष्टाचारी पार्टियों ने एक साथ मिलकर उनकी बातों का समर्थन भी किया मगर देश के नागरिकों पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा यहां तक की कुछ नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट में भी लेकर गए वहां पर सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया इस पर और कोई जाँच की आवश्यकता नहीं है।

मगर राहुल को यह बात पता है कि किसी भी तरफ लोगों के मन में यह परसेप्शन डालना है कि नरेंद्र मोदी ही भ्रष्ट है उनके रणनीतिकारों ने उन्हें सिखाया है कि कि झूठ को बार-बार बोलिए ताकि कुछ लोग उसे सच मानने लगे और उन्होंने भी वही किया उन्होंने अब तक जितने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की है वह सारी प्रेस कॉन्फ्रेंस राफेल मुद्दे पर लेकर ही की है उन्होंने हर बार एक नए आरोप लगाए हर बार उनकी आरोप झूठी साबित हुई और ताबूत में आखिरी कील का काम किया CAG की रिपोर्ट न।

Cag ने रिपोर्ट दी कि रफाएल अभिमान के सौदों में कोई दलाली नहीं हुई है और कीमत के मामले में भी यह 2006 के यूपीए के सौदे से 2 दशमलव 8 प्रतिशत सस्ता है इसके अलावा सीएजी ने यह भी बताया कि इसमें डिलीवरी को लेकर भी पहले के मुकाबले काफी अच्छे नियम है और सितंबर ,अक्टूबर तक सारे 36 विमानों का भारतीय सेना में आगमन हो जाएगा हालाँकि सीएजी ने इसमें लेटर ऑफ इंडिमनिटी को लेकर सरकार के ऊपर भी थोड़ी सी चपत लगाई है हालांकि सरकार का कहना है कि उनके पास फ्रांस के प्रधानमंत्री का लेटर ऑफ से sovereignty है। जब सीएजी की रिपोर्ट आई तो उम्मीद के मुताबिक कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को नकार दिया उन्होंने उसका नाम चौकीदार ऑडिटर जनरल रखा और हमेशा की तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नरेंद्र मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, इससे एक बात तो साफ जाहिर होती है कि विपक्ष को देश की किसी भी संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं है चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो सीबीआई हो या फिर सीएजी हो उन्हें विश्वास है तो सिर्फ गांधी खानदान के सुपुत्र राहुल गांधी के बयानों का, बहुत पहले केजरीवाल के लिए यह कहा जाता था खाता ना बही जो केजरीवाल कहे वह सही अब यही चीज हम राहुल गांधी के लिए कह सकते हैं उम्मीद है राहुल केजरीवाल का हश्र देखकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय कुछ ठोस काम काम करेंगे नहीं तो यह पब्लिक है सब जानती है।

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